मुंबई

मुंबई  में अपना मेयर बनाने का सपना देख रही भाजपा को शिवसेना ने जोर का झटका दिया है। मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) उपचुनाव में मुंह की खाने के बाद शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने शुक्रवार को राज ठाकरे की पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के सात में से छह पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल कर एक किक में भाजपा और मनसे दोनों को ही चित कर दिया है।
बीएमसी उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद कुल 227 सदस्यीय सदन में भाजपा के 83 और शिवसेना के 84 पार्षद हो गए हैं। इसके बाद भाजपा साल 2019 में मुंबई में अपना मेयर बनाने की योजना बना रही थी। भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने बृहस्पतिवार को उपचुनाव के नतीजे आने के बाद कहा था कि मुंबई का अगला मेयर भाजपा का होगा।

सोमैया के दावे के कुछ घंटे बाद ही शिवसेना ने मनसे के छह पार्षदों को अपने पाले में लाकर भाजपा की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। अब सोमैया का आरोप है कि शिवसेना ने तीन-तीन करोड़ रुपये में मनसे के पार्षदों की खरीद-फरोख्त की है। वहीं, शिवसेना छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाने वाले राज ठाकरे के राजनीतिक कॅरियर में यह सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है।

 मनसे से शिवसेना में शामिल होने वाले मनसे के पार्षदों ने कोकण विभागीय आयुक्त से अलग गुट के रूप में मान्यता प्रदान करने की मांग की है। दूसरी ओर, मनसे के संदीप देशपांडे ने कोकण विभागीय आयुक्त को पत्र लिखा है कि शिवसेना में शामिल होने वाले पार्षदों को अलग गुट की मान्यता न दी जाए।
एशिया की सबसे बड़ी महानगरपालिका

बीएमसी एशिया की सबसे वैभवशाली महानगरपालिका है, जिसका वार्षिक बजट 39 हजार करोड़ रुपये है। यह देश के करीब एक दर्जन छोटे राज्यों के वार्षिक बजट से कहीं ज्यादा है। शिवसेना पिछले 25 साल से बीएमसी की सत्ता में है लेकिन, इस साल हुए चुनाव में बीजेपी ने गठबंधन तोड़कर अलग चुनाव लड़ा और शिवसेना के 84 सीटों के मुकाबले में 82 सीटें जीती हैं।

उद्धव ने कहा तोड़फोड़ नहीं घर वापसी
मनसे के छह नगर सेवकों को पार्टी में शामिल करने के बाद उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह तोड़फोड़ नहीं है। मनसे के पार्षद पूर्व के शिव सैनिक है। अब उनकी घर वापसी हुई है।

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