नई दिल्ली 
लेह-लद्दाख, सिक्किम, अरूणाचल जैसे जगहों के दुर्गम इलाकों में तैनात सेना के जवान अब दूर रहकर भी अपनों को करीब महसूस कर सकेंगे। अब तक ये सैनिक अपने परिजनों से बात करने को तरस जाते थे। सेल्युलर कवरेज न होने की वजह से और सेटलाइट कॉल महंगी होने की वजह से ये सैनिक कई महीनों तक अपनों की आवाज सुनते को तरसते थे। लेकिन अब जब चाहे सैनिक अपनों की आवाज सुन सकेंगे और उन्हें पास महसूस कर सकेंगे। 

आर्मी ने अरुणाचल, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड, हिमाचल, लेह-लद्दाख जैसे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए वेलफेयर कम्युनिकेशन तैयार किया है। इसमें 193 नंबर के जरिए सैनिक कभी भी अपने परिवार वालों से बात कर सकेंगे। आर्मी के एक अधिकारी के मुताबिक सिगनल्स महानिदेशक लेफ्टिनंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद जब उत्तराखंड के हर्षल इलाके में गए तो वहां तैनात जवानों ने उनसे कहा कि अगर उन्हें अपने परिवार वालों से बात करने का साधन मिल जाए तो अच्छा रहेगा। जिसके बाद इंडियन आर्मी ने मॉर्डन कम्युनिकेशन मीडियम विकसित किया और इसे वेलफेयर कम्युनिकेशन का नाम दिया गया। हर्षल में यह शुरू किया गया, जिसके जरिए सैनिक फ्री में अपने घरों पर बात कर सकते हैं। 

यहां से अब हर दिन करीब 2700 कॉल हो रही हैं। आर्मी के अधिकारी के मुताबिक अब इस सुविधा को सिक्किम के नाथुला सहित सभी दूरगामी इलाकों में जोड़ दिया गया है। वहां तैनात सैनिक अब जब चाहे अपनों से बात कर सकते हैं। इसके लिए एक वेलफेयर सेंटर बनाया गया है वहां से जवान फोन कर सकेंगे। लेफ्टिनेंट जनरल आशीष रंजन प्रसाद के मुताबिक इससे सैनिकों का और उनके परिवार दोनों का मनोबल बढ़ेगा। 

Source : Agency