जबलपुर
 आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत जिस तरीके से सरकार गरीब (बीपीएल) कार्डधारियों के बच्चों का एडमिशन निजी स्कूलों में करवा रही है। उससे सरकारी प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों में हड़कंप मच गया है, क्योंकि अभिभावक भी सरकारी स्कूलों को तवज्जो नहीं दे रहे। मध्यमवर्गीय परिवार हो या गरीब वर्ग सभी का रुझान सरकारी की बजाए निजी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन कराने की तरफ बढ़ रहा है।

इस कारण सरकारी स्कूलों में एडमिशन की संख्या तेजी से घट रही है। आरटीई के तहत कराए गए एडमिशन के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि पिछले 5 सालों में 25,740 बच्चे के एडमिशन सरकार ने निजी स्कूलों में करा दिए। नतीजा ये हुआ कि सीधे तौर पर सरकारी स्कूलों से 25 हजार बच्चे कम हो गए। शिक्षकों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में वैसे भी बच्चे कम थे अब नए एडमिशन भी मुश्किल से हो रहे।

कहीं 15 तो कहीं 40 के एडमिशन

- सरकारी प्राइमरी स्कूलों की बातें करें तो 1 अप्रैल से अब तक पहली कक्षा में कहीं 15 तो कहीं 40 बच्चों के ही नए एडमिशन हुए हैं।

- मध्यम वर्गीय परिवार अपने बच्चों के एडमिशन निजी स्कूलों ही कराते हैं। वहीं आरटीई लागू होने से अब गरीब वर्गीय परिवार भी बच्चों के एडमिशन निजी स्कूलों में कराने की चाह में एडमिशन नहीं करा रहे। - प्राइमरी स्कूल नया मुहल्ला, खलासी लाइन, पंचशील, घमापुर सहित शहर अधिकांश स्कूलों में नए बच्चों के एडमिशन का आंकड़ा काफी कम है। शिक्षक ये उम्मींद लगाए बैठे हैं कि 31 जुलाई तक शायद संख्या बढ़ जाए।

इसलिए डरे शिक्षक

- प्राइमरी स्कूलों में तेजी से कम होती बच्चों की संख्या को देखते हुए शिक्षा विभाग ने 20 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद कर दूसरी स्कूल में मर्ज करने की तैयारी शुरू कर दी।

- दमोह जिले में इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। यहां 20 छात्र संख्या से कम वाले 50 स्कूलों को बंद करने के फरमान भी जारी कर दिए गए हैं।

- जिले में ऐसे करीब 260 स्कूल चिन्हित किए गए हैं जिसमें छात्र संख्या 20 से कम हैं। पिछले 2 साल से बच्चों की संख्या बढ़ाने की कवायद की जा रही है लेकिन एडमिशन हो नहीं पा रहे।

- सरकारी की योजना कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को पास के स्कूलों में मर्ज कर शिक्षकों को भी इधर से उधर करने की है। यदि ऐसा हुआ तो शिक्षकों की आराम की नौकरी खतरे में पड़ जाएगी।

निजी स्कूलों में आरटीई के तहत हुए एडमिशन

शिक्षण सत्र - एडमिशन दिलाए

2012-13 - 4262

2013-14 - 4893

2014-15 -6469

2015-16 -6318

2016-17 - 3798

2017-18 - 7 हजार आवेदन

आरटीई सरकार की योजना है। इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। सरकारी स्कूलों में अधिक से अधिक बच्चों के प्रवेश कराने स्कूल चले हम अभियान चलाया जा रहा है। डॉ. आरपी चतुर्वेदी, डीपीसी

सरकार निजी स्कूलों में न सिर्फ अधिक से अधिक एडमिशन करा रही है। बल्कि फीस भी चुका रही। ऐसे में सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या घट रही है। सरकार निजीकरण की राह पर चल पड़ी है। मुकेश सिंह, तृतीय वर्ग शासकीय कर्मचारी संघ अध्यापक प्रकोष्ठ

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