मुंबई 
अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के जिस शूटर सैम को दुबई से भारत लाने की कोशिशें चल रही हैं, मुंबई पुलिस का दावा है कि 90 के दशक में मुंबई में हुए कई बड़े शूटआउट का वह हैंडलर था। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा ने बुधवार को एनबीटी को बताया कि सैम को अंडरवर्ल्ड में सैयद सैम के नाम से जाना जाता है। उसे दाऊद और छोटा शकील ने टारगेट वेरिफाई करने का जिम्मा सौंपा था। बताया जा रहा है कि शूटर सैम का फर्जी पासपोर्ट यूपी के ही एक गांव के पते पर बना था।  
 

साल 1997 में डी कंपनी के लोगों ने जे.जे अस्पताल से फिरोज कोकणी को अंधाधुंध गोलीबारी के बाद भगाया था। इसमें एक सिपाही मारा गया था। महाराष्ट्र के वर्तमान डीजीपी दत्तात्रय पडसलगीकर उन दिनों मुंबई में डीसीपी थे। उनके नेतृत्व में तब मुंबई पुलिस ने उस शूटआउट में शामिल कई आरोपियों को एनकाउंटर में मारा था, जबकि आरिफ मिर्जा बेग, सैयद सैम सहित कई लोगों को गिरफ्तार भी किया था। बाद में सैम, बेग व अन्य लोग जमानत पर छूट गए थे और मुंबई से विदेश भाग गए थे। बेग को कुछ साल पहले कोलंबो में पकड़ा गया और भारत लाया गया, जबकि सैम अलग-अलग देशों में रहा। इन दिनों वह दुबई की जेल में बंद है। फिरोज कोकणी की बाद में खुद छोटा शकील ने पाकिस्तान में हत्या करवा दी थी। 

छह साल पहले मिला सुराग 
साल 2012 में यूपी एटीएस ने जहांगीर नामक आरोपी को फर्जी पासपोर्ट के मामले में गिरफ्तार किया था। उसने सैम, बेग व अन्य आरोपियों से जुड़े कई सनसनीखेज खुलासे किए थे। जहांगीर के अनुसार, 1998 से 2004 तक वह अपने साथियों के साथ जेल में था। उसी दौरान जहांगीर ने अपने एक भाई के माध्यम से अपने बलरामपुर स्थित गांव के पते से तीन पासपोर्ट बनवाए थे। जहांगीर का अपना पासपोर्ट हसीन सिद्दीकी के नाम से, मिर्जा आरिफ बेग का नासिर के नाम से और सैम का समीर खान नाम से बनवाया गया था। जेल से छूटने के बाद तीनों इन्हीं पासपोर्ट को लेकर पहले कोलकाता गए। वहां से बैंकाक, फिर चीन, फिर हांगकांग, मकाऊ और फिर इंडोनेशिया चले गए थे। शेष दोनों आरोपी विदेश से तो या तो डिपोर्ट कर दिए गए या गिरफ्तार हो गए, पर सैम बाद में दुबई में ही शिफ्ट हो गया। वहां वह उस फारूख देवाड़ीवाला का करीबी हो गया, जिसने भाजपा नेता हरेन पंड्या का गुजरात में मर्डर करवाया था। 

फिदायीन ट्रेनिंग 
इसी फारूख देवाड़ीवाला ने बाद में जोगेश्वरी के मिर्जा फैजल खान को फिदायीन ट्रेनिंग के लिए पाकिस्तान भेज दिया था। वहां मिर्जा खान को फिदायीन के अलावा भारत में रेलवे की पटरियां धमाकों से कैसे उड़ानी है, उसकी भी ट्रेनिंग दी गई थी। फिदायीन हमला अगले साल आम चुनाव के दौरान करना था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद मिर्जा खान दुबई में सैम के घर भी रुका था और उसके जिम में इलेक्ट्रिशियन का काम भी किया था। उसे महाराष्ट्र एटीएस ने कुछ महीने पहले जोगेश्वरी से, जबकि उसके साथी अल्लारखा अबू बकर मंसूरी को गांधीधाम से पकड़ा था। उसी के बाद फारूख देवाड़ीवाला व सैयद सैम दुबई में गिरफ्तार हो गए थे। चूंकि देवाड़ीवाला के पास फर्जी पाकिस्तानी पासपोर्ट था, इसलिए पाकिस्तान उसे दुबई पुलिस की हिरासत से बाहर निकालने और पाकिस्तान बुलाने में कामयाब हो गया, लेकिन सैम का भारतीय एजेंसियों ने समीर खान नाम से बना भारतीय पासपोर्ट दुबई पुलिस को सौंप दिया, इसलिए वह अभी भी दुबई की जेल में है। उसे भारत लाने की कोशिशें चल रही हैं। 

मुन्ना झिंगाड़ा का करीबी था सैम 
प्रदीप शर्मा के अनुसार, सैम उस मुन्ना झिंगाड़ा का भी बहुत करीबी था, जिसने साल 2000 में बैंकॉक में छोटा राजन पर गोलियां चलाई थीं। मुन्ना के भारत प्रत्यर्पण का केस इन दिनों बैंकॉक की ऊपरी अदालत में है। शर्मा कहते हैं सैम का नाम जितेंद्र दाभोलकर हत्याकांड में भी सामने आया था। उसके भारत आने के बाद डी कंपनी से जुड़े कई सनसनीखेज राज खुलने की उम्मीद है। 
 

Source : Agency