मुंबई 
फाइनैंशल प्लानिंग के बारे में राय देने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई के रीपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की कमी कर देने के बाद रीटेल निवेशकों को शॉर्ट टू मीडियम टर्म के लिए एक्रुअल फंड्स में निवेश बनाए रखना चाहिए। उनका कहना है कि जोखिम उठा सकने वाले और कम से कम तीन साल के लिए निवेश कर सकने वाले निवेशक अपने पोर्टफोलियो का 20-25 प्रतिशत हिस्सा क्रेडिट रिस्क या कॉरपोरेट बॉन्ड फंड्स में एलोकेट कर सकते हैं, जिनके पोर्टफोलियो कॉन्संट्रेटेड नहीं होते हैं। 

वेल्थ मैनेजरों का मानना है कि बॉन्ड मार्केट्स ने 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड में गिरावट का असर शामिल कर लिया है। इसलिए वे कम अवधि वाले या एक्रुअल फंड्स में निवेश बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं। फंड्सइंडियाडॉटकॉम में रिसर्च हेड विद्या बाला ने कहा, '10 साल के सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के सितंबर 2018 के 8 प्रतिशत से घटकर 7.4 प्रतिशत पर आ जाने मार्केट ने तटस्थ रुख दिखाया है। गवर्नमेंट और स्टेट बॉन्ड्स की सप्लाई ज्यादा रहने की उम्मीद को देखते हुए प्राइस रैली की ज्यादा गुंजाइश शायद न बने।' 

रूपेश भंसाली का मानना है कि कम अवधि वाले फंड्स में देखना हो तो निवेशक बैंकिंग और पीएसयू डेट फंड्स पर विचार कर सकते हैं क्योंकि इन स्कीमों का एएए रेटेड पोर्टफोलियो होता है और इनका ज्यादा निवेश बैंकिंग और पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में होता है। उनकी सलाह है कि इस कैटिगरी में निवेशकों को एक्सिस बैंकिंग ऐंड पीएसयू डेट फंड और आईडीएफसी बैंकिंग ऐंड पीएसयू डेट फंड में निवेश करना चाहिए। इन फंड्स की अवधि क्रमश: 2.5 साल और 3.19 साल की है। 

जो निवेशक ज्यादा जोखिम उठा सकते हों और अधिक रिटर्न पाना चाहते हों, वे अपने पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा कॉरपोरेट बॉन्ड और क्रेडिट रिस्क फंड्स में लगा सकते हैं। मनी हनी फाइनैंशल सर्विसेज के सीईओ अनूप ने कहा, 'निवेशक क्रेडिट रिस्क फंड्स मे अपने पोर्टफोलियो का 15-20 प्रतिशत हिस्सा निवेश कर सकते हैं। वे उन फंड्स पर विचार कर सकते हैं, जिनमें किसी भी एक कंपनी में निवेश 6-8 प्रतिशत से ज्यादा न हो।' 

फ्रैंकलिन टेंपलटन के मैनेजिंग डायरेक्टर (EMEA एंड इंडिया) विवेक कुदवा ने कहा, 'डेट फंड्स के पोर्टफोलियो में ज्यादा सिक्यॉरिटीज होनी चाहिए ताकि कॉन्संट्रेशन रिस्क कम हो सके। इससे होगा यह कि किसी डाउनग्रेड का असर कम पड़ेगा।' 

उदाहरण के लिए, पोर्टफोलियो की टॉप होल्डिंग कंपनी का वेटेज 6 प्रतिशत ही हो और रेटिंग डाउनग्रेड के कारण 25 प्रतिशत मार्कडाउन हो जाए तो स्कीम की नेट एसेट वैल्यू पर इसका असर 1.5 प्रतिशत ही होगा। लिहाजा अगर कोई क्रेडिट रिस्क फंड पांच साल की अवधि में 9 प्रतिशत का रिटर्न दे रहा हो तो वह 45 प्रतिशत का एब्सॉल्यूट रिटर्न देगा, वहीं 7 प्रतिशत सालाना रिटर्न देने वाला फिक्स्ड डिपॉजिट फंड 35 प्रतिशत रिटर्न देगा। दो कंपनियों के चलते 1.5 प्रतिशत का मार्कडाउन होने और पांच साल की अवधि मे निवेशक का नुकसान 3 प्रतिशत होने पर भी गेन 42 प्रतिशत रहेगा, जो एफडी से मिलने वाले रिटर्न से अधिक होगा। 

क्रेडिट रिस्क कैटेगरी में अनूप की सलाह यह है कि एचडीएफसी क्रेडिट रिस्क फंड में पैसा लगाया जाए, जिसके पोर्टफोलियो में 277 सिक्यॉरिटीज हैं। वह 124 सिक्यॉरिटीज वाले आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल क्रेडिट रिस्क फंड और 96 सिक्यॉरिटीज वाले फ्रैंकलिन इंडिया क्रेडिट रिस्क फंड में भी निवेश की सलाह दे रहे हैं। 
 

Source : Agency