मुंबई
भारतीय शेयर बाजार पिछले एक साल में करीब-करीब फ्लैट रहा है। कई सेक्टर दबाव में हैं। टेलिकॉम सेक्टर को ट्रैक करने वाला ईटी टेलिसर्विसेज इंडेक्स इस बीच 45 पर्सेंट गिरा है। रीयल्टी, मेटल, इन्फ्रा, ऑटो और टेक्सटाइल सेक्टर ने भी बेंचमार्क इंडेक्स को अंडरपरफॉर्म किया है। किसी भी सेक्टर में टर्नअराउंड की शुरुआत बड़ी कंपनियों से होती है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसलिए अंडरपरफॉर्मिंग इंडस्ट्रीज में ऐसी कंपनियों में निवेश करना स्मार्ट स्ट्रैटिजी है। 
 
कुछ फंड हाउसों ने इसी को ध्यान में रखकर 'स्पेशल सिचुएशंस' (विशेष परिस्थितियों के) फंड लॉन्च किए हैं तो कुछ वैल्यू स्ट्रैटिजी के तहत इन कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। ये फंड अंडरपरफॉर्मिंग सेक्टर में अच्छा परफॉर्म करने वाली कंपनियों पर बुलिश हैं। उनका कहना है कि कई बार जब किसी सेक्टर का प्रदर्शन खराब होता है तो उस सेगमेंट की अच्छी कंपनियों के शेयर प्राइस में भी गिरावट आती है। ऐसे कई अच्छे शेयरों का मार्केट प्राइस उनकी इंट्रिंसिक वैल्यू से कम हो गया है। इसलिए वैल्यू फंड्स उनमें निवेश कर रहे हैं। इस बारे में यूनियन म्यूचुअल फंड के सीईओ जी प्रदीप कुमार ने कहा, 'सेक्टर संबंधी समस्या के चलते अच्छे स्टॉक्स भी पिटे हैं। इनमें से कई शेयर इंट्रिंसिक वैल्यू से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। हम अपने वैल्यूएशन मॉडल के मुताबिक इनमें निवेश कर रहे हैं। हमने ऐसे कई शेयरों को अपने यूनियन वैल्यू डिस्कवरी फंड में शामिल किया है।' 

ऐसी कंपनियों में निवेश करने से पहले यह बात समझ लेनी चाहिए कि इसमें रिस्क भी अधिक होता है। हो सकता है कि संबंधित सेक्टर के टर्नअराउंड में उम्मीद से अधिक समय लगे। ऐसे में आपके चुने हुए शेयर में लंबे समय तक गिरावट जारी रह सकती है। यह हाई रिस्क, हाई रिटर्न स्ट्रैटिजी है। सिर्फ लॉन्ग टर्म निवेशकों को ही ऐसे शेयरों में पैसा लगाने पर विचार करना चाहिए। जानकारों का कहना है कि ऐसी कंपनियों में कम-से-कम पांच साल के लिए निवेश करना ठीक रहता है। 

निवेश के लिए शेयर चुनने की शुरुआत करते वक्त उन सेक्टर्स को छांट दीजिए, जिनमें हाल-फिलहाल रिकवरी की उम्मीद नहीं है। इस संदर्भ में टेलिकॉम सेक्टर की मिसाल दी जा सकती है। भले ही टेलिकॉम स्टॉक्स में काफी गिरावट आ चुकी है, लेकिन इसकी मुश्किलें जल्द खत्म होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। यस सिक्यॉरिटीज के प्रेजिडेंट और रिसर्च हेड अमर अंबानी ने कहा, 'निवेशकों को इसका ध्यान रखना चाहिए कि जबरदस्त कॉम्पिटीशन के बावजूद रिलायंस जियो इन्फोकॉम मुनाफे में है। इसका मतलब यह है कि वह अग्रेसिव प्राइसिंग स्ट्रैटिजी पर लंबे समय तक टिकी रह सकती है। इसलिए टेलिकॉम सेक्टर से दूर रहना ठीक रहेगा।' कार्वी कैपिटल में पीएमएस के फंड मैनेजर फणी शेखर ने भी कहा, 'यह सेक्टर कई मुश्किलों से जूझ रहा है। इसकी रिकवरी में दो से तीन साल का समय लग सकता है।' 

Source : Agency