भोपाल 
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने आगामी सत्र 2019-20 में कालेजों की मान्यता और उनकी निरंतरता जारी करने की प्रक्रिया पर शुरू कर दी है। एआईसीटीई ऐसे कालेजों की सीटों पर कटौती करेगा, जिनके तीन सालों में तीस फीसदी से कम प्रवेश हुए हैं। वहीं कालेजों के अकस्मिक निरीक्षण भी किए जाएंगे, जिससे उनकी मान्यता तत्काल खत्म कर दी जाएगी। 

इंजीनियरिंग एजुकेशन की पढ़ाई का ढांचा काफी बिगड़ चुका है। उसे ठीक करने के लिए एआईसीटीई ने कुछ कठोर कमद उठाना शुरु कर दिया है। कालेज एआईसीटीई के मापदंडों पर खरे नहीं उतरे तो उनकी सीटों की बड़े स्तर पर कटौती की जाएगी। वहीं फर्जीवाड़ा उजागर होने पर उनकी मान्यता तक तत्काल खत्म कर दी जाएगी। इसके लिए एआईसीटीई ने देशरभर से कालेजों की मान्यता को निरंतर करने के लिए आवेदन मांगें थे, जिसकी अंतिम तिथि आठ फरवरी रखी थी। ये तिथि कालेजों की मांग पर दूसरी बार तीन फरवरी को बढ़ाकर आठ फरवरी किया गया था। अब एआईसीटीई कालेजों से आए आवेदनों की स्कू्रटनी करेगा। इसके बाद उनकी मान्यता की निरंतरता जारी करेगा। 

राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की संबद्धता लेने की अंतिम तिथि बीतने पर आवेदन करने का लिंक बंद कर दिया है। अब उन्हें संबद्धता लेने के लिए हरेक ब्रांच के लिए दो लाख रुपए तक का विलंब शुल्क देना होगा। इसके लिए वे 31 मार्च तक आवेदन कर पाएंगे। 

एआईसीटीई ने सभी कालेजों से फैकल्टी, स्टाफ, लाइब्रेरी, भवन निर्माण, स्टूडेंटस सहित अन्य बिंदुओ पर जानकारी मांगी है। कालेजों द्वारा दी गई जानकारी कितनी सही इसको मापने उनके आकस्मिक निरीक्षण कराए जाएंगे। ये व्यवस्था पूरे देश में लागू होगी। इसलिए मप्र पर खास फोकस रहेगा। निरीक्षण के दौरान कालेजों में फर्जीवाड़ा उजागर होता है, तो उनकी सीटों में जमकर कटौती की जाएगी। 

प्रदेश में 160 निजी और सरकारी इंजीनियरिंग कालेज संचालित हो रहे हैं। ये कालेज आगामी सत्र 2019-20 में प्रवेश कराने के लिए एआईसीटीई में अपनी निरंतरता के लिए आवेदन कर चुके हैं। उक्त 160 कालेजों में करीब 62 हजार सीटें हैं। एआईसीटीई दस्तावेजों का परीक्षण करता है, तो उनकी सीटों में भारी कटौती भी हो सकती है। क्योंकि कई कालेजों ने निरंतरता के लिए फर्जीवाड़े का सहारा भी लिया है। इससे उनकी सीटों पर कटौती होना भी तय हो गया है। 

Source : Agency