जोर लगाके लड़ेंगे और शान से जीतेंगे :- सुरेश पचौरी

 

मध्यप्रदेश कांग्रेस चुनाव योजना समिति के प्रमुख सुरेश पचौरी से हेमन्त चतुर्वेदी की सीधी बात...

 

मध्यप्रदेश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य को कैसे देखते हैं ?

मध्यप्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में सिर्फ सरकार के खिलाफ नाराजगी देखने को मिल रही है। आप ही खुद ही देख सकते हैं, मौजूदा वक्त में ऐसा कौन सा वर्ग है जो भाजपा सरकार की नीतियों से परेशान नहीं है। कर्मचारियों से लेकर किसान तक, युवाओं से लेकर महिलाओं तक, हर कोई सरकार से नाराज चल रहा है। सरकार घोषणाएं तो करती है, लेकिन वह सिर्फ विज्ञापनों तक ही सीमित रह जाती है। लिहाजा अब जनता ने पूरा मन बना लिया है, कि इन चुनाव में शिवराज सिंह और भाजपा को सत्ता से हटाना है। 

मध्यप्रदेश कांग्रेस में जो बदलाव हुआ, उसके बारे में जानना चाहेंगे ?

कांग्रेस हाईकमान ने पार्टी के वरिष्ठ और अनुभवी नेता कमलनाथ के हाथ में प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी है और वह प्रदेश के ही नहीं बल्कि देश के चुनिंदा राजनेताओं में से एक हैं। छिंदवाड़ा के सांसद रहते उन्होने जो विकास किया वह आज हर किसी के लिए रोल मॉडल है। उनके मैनेजमेंट शैली का प्रभाव आप देख ही रहे होंगे, कुछ मिलाकर राहुल गांधी ने मध्यप्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष के तौर पर एक बेहतरीन चुनाव किया है। इसके साथ ही चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी एक युवा और ऊर्जावान चेहरे सिंधिया जी के कंधों पर डाली है और अन्य अनुभवी नेताओं को जो भूमिका दी है, उसका फायदा निश्चित ही पूरी कांग्रेस को मिलेगा।

 

बीते एक महीने में कांग्रेस में माहौल पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है, इसे कैसे देखते हैं ?

जी हां, पिछले एक महीने में पूरी कांग्रेस में उत्साह का संचार हुआ है। एक सशक्त नेतृत्व के चलते हमारा कार्यकर्ता भी खुद को ऊर्जावान और मजबूत महसूस कर रहा है। हाल ही में कई एजेंसी और समाचार चैनलों के सर्वे में कांग्रेस की बढ़त दिखाई जा रही है। मतलब साफ है, कि जनता ने इस बार कांग्रेस को मौका देने का मन बना लिया है, लेकिन अभी हम किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। चुनाव में अभी बहुत वक्त है और हम हर कदम फूंक फूंक कर रख रहे हैं और हमारी कोशिश इस माहौल को विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखने की है।

 

वो ऐसे कौनसे कारण थे, जिनके कारण कांग्रेस बीते डेढ़ दशक से प्रदेश में हाशिए पर थी ?

अब तक क्या रहा क्यों रहा, इन विषयों पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं रह जाता है। लेकिन हां, अपनी तमाम पिछली गलतियों से सबक लेकर अब कांग्रेस चुनावी मैदान में उतरी है और हमारी कोशिश है, कि उन स्थितियों का अब दोहराब न हो जिनके चलते बीते डेढ़ दशक से कांग्रेस मध्यप्रदेश में उभर नहीं पा रही थी। कुल मिलाकर हमें अभी एकजुट रहकर और सतर्क होकर काम करना है। हमें अभी वर्तमान की ओर देखना है भविष्य की ओर निहारना है और पार्टी की भलाई के उद्देश्य से काम करना है। यही इस वक्त पूरी कांग्रेस का विजन है।

आपकी चुनावी रणनीति की जिम्मेदारी सौंपी गई है, क्या कुछ प्रमुख रणनीति रहने वाली है कांग्रेस की इस चुनाव में ?

देखिए रणनीति तो रणनीति होती है, इसे सार्वजनिक कर दिया तो फिर कैसी रणनीति। लेकिन कुछ बिंदू हैं, जिन्हें मैं आपके साथ साझा करना चाहूंगा, जैसे पोलिंग बूथ पर प्रभावी कार्यकर्ताओं की तैनाती, चुनाव में जिताऊ और उचित चेहरे को चयन और एक आक्रामक और प्रभावी प्रचार। इन सभी पहलुओं पर कांग्रेस बारीकी से काम कर रही है और हमारा मकसद इस बार सिर्फ सत्तारूढ़ भाजपा को कड़ी चुनौती देना नहीं है, बल्कि उसे सत्ता से बेदखल करना है। जो हम करके दिखाएंगे।

 

(साभार - राजनीतिकमर्म)