समर्पणता और संघर्ष से मिली सफलता  - मंत्री ललित यादव

 

मध्यप्रदेश शासन की राज्यमंत्री ललिता यादव के साथ हेमन्त चतुर्वेदी की सीधी बात...

 

सवाल- अपने अब तक के सियासी सफर को कैसे देखती हैं आप ?

जवाब- सियासत के सफर के बारे में बात करें, तो वह सही मायनों में इतना बड़ा है, कि उसे कुछेक शब्दों में बयां कर पाना संभव नहीं है। मैं राजनीति से छात्र जीवन में ही जुड़ गई थी, और मुझे उस वक्त बीजेपी के टिकट पर पार्षद का चुनाव लड़ने का मौका मिला। मैं अपना शुरूआती चुनाव नहीं जीत सकी, लेकिन इसके बाद भाजपा ने मुझ पर विश्वास जताया और नगरपालिका अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया। जिसमें मैंने शानदार जीत हासिल की। उसके बाद संगठन में मुझे एक के बाद एक अहम जिम्मेदारियों से नवाजा गया, जिनका मैंने समर्पणता के साथ पालन किया। उसके बाद 2008 और 2013 में भाजपा ने मुझे विधानसभा का चुनाव लड़ने का मौका दिया, इसमें भी मुझे सफलता हासिल हुई और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने इस कार्यकाल में मुझे अपने मंत्रिमंडल का हिस्सा बनाया।

 

 

सवाल- अक्सर महिलाओं से राजनीति के जुड़ाव पर सवाल उठते हैं, आप कैसे देखती हो इस बात को ?

जवाब- इस बात का जवाब मैं सिर्फ यह कहकर देना चाहूंगी, कि किसी व्यवस्था का सुधारना हम सबकी जिम्मेदारी है। आज जब राजनीति को महिलाओं के लिए गलत माना जाता है, तो हमें सोचने की जरूरत है, कि आखिर यह स्थिति क्यों बनती है। अगर ज्यादा से ज्यादा से महिला इससे जुड़ती हैं, तो स्वभाविक है, कि लोगों की सोच इसे लेकर बदलेगी। इसके अलावा एक बात और...आज के जमाने में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं, तो भला राजनीति में क्यों पीछे रहें। और ऐसा हमें होने भी नहीं देना।

 

सवाल- एक महिला होने के नाते व्यक्तिगत तौर पर आपके सामने किस तरह की स्थिति पेश आई ?

जवाब- राजनीति में मैंने सालों नहीं बल्कि दशकों गुजार दिए, लेकिन आजतक मुझे महिला होने के नाते किसी भी तरह की नकारात्मक स्थिति का सामना नहीं करना पड़ा। इसके पीछे शायद मेरी जन्मभूमि के प्रभाव को भी आप जिम्मेदार मान सकते हो, क्योंकि बुंदेलखंड की जमीन पर ही रानी लक्ष्मीबाई का जन्म हुआ है, तो वहां की बेटी कैसे कभी कमजोर साबित हो सकती है। मैं आपको बताना चाहूंगी, कि कई दफा राजनीतिक कारणों से, तो कई दफा सामाजिक कारणों से तमाम कथित दबंगों का मैंने मुकाबला किया, लेकिन कोई भी मुझे झुका नहीं सका। कुल मिलाकर आज के जमाने में किसी स्त्री को कमजोर मानना पूरी तरह गलत है।

 

 

सवाल- अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी ?

जवाब- एक महिला तब तक सफल नही हो सकती, जब तक उसका पति उसके साथ न हो। यहां पर मैं भी अपनी सफलता का श्रेय अपनी पति को ही देना चाहूंगी। जिन्होने परिवार से लेकर समाज और समाज से सियासत तक मेरा भरपूर सहयोग किया और हर मोड़ पर दृढ़ता के साथ मेरे पीछे खड़े रहे। इसके बाद मेरी हर सफलता में भारतीय जनता पार्टी का बड़ा योगदान है। जिसने हर दफा अपनी इस छोटी सी कार्यकर्ता पर भरोसा जताकर उसे आगे बढ़ाया। यहां पर मैं किसी एक नेता का नाम नहीं लूंगी, लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि मुझे पूरी पार्टी का हरदम सहयोग मिला। जिसकी वजह से आज में यहां हूं।

 

सवालमहिलाओं को क्या संदेश देना चाहोगी ?

जवाब- महिलाओं को लेकर अपनी बात को मैं पहले ही सामने रख चुकी हूं। जहां तक मेरा मानना है, आज के दौर में महिलाओं को आगे बढ़कर अपने हक के लिए लड़ने की जरूरत है। एक छोटा सा उदाहरण देना चाहूंगी, कि हाल ही मैं सम्पन्न अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्पर्धा में किस तरह देश की बेटियों ने देश का और अपने माता पिता का नाम रोशन किया जाहिर है, आज का जमाना लड़का लड़की में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं देखता। तो भला हम क्यों इस बारे में सोचें।

(साभार राजनीतिक मर्म)